कुछ तो हैं जो तय करना अभी बाकी हैं
कई दफा और जीना मरना अभी बाकी हैं
खोल देखा मुड़े पन्ने जो जीवन के
निकले वही जिनमे लिखना अभी बाकी हैं
लग सीखा दरिया मे ,तैर लेने का हुनर
डूबा बहोत , उतर जाना बाकी है
ढल रहा है सूरज , उसे कहाँ ख़बर
उम्मीदें झाखे है धोस्लो से , पूरा करना अभी बाकी है
हस के बढ़ गये आगे , समझाया तो बहोत होगा
ये जवाब तेरा था , सवाल मेरा अभी बाकी है
धूल थी आइने में , या मेरी आखो में
जर्रे जर्रे में तेरा होना अभी बाकी है
अधूरी सांस , अधूरी धड़कन और बंद होती ये आँखे
एहसास नया सा है , बया करना अभी बाकी है
अर्पित चतुर्वेदी

Kal phir vo waqt hota tu mere samne hoga nazre jhuki teri bhi hongi meri bhi hogi magar muskan dono ke chehare pe hoga…
Dekhna mujhe bhi hoga tujhe bhi hoga magar zaleem ye jamana hoga…
Adda tu bhi badlegi baate hum bhi badlenge lakin phir use mohhabbat pe aana hoga…
Kuch pal tujhe bhi sharm aayegi kya kai bar palke humari bhi jhukegi par gale tujhe bhi lagna hoga magar muskan dono ke chehare pe hoga…

लाख टके की बात –

कोई नही देगा साथ तेरा यहॉं,
हर कोई यहॉं खुद ही में मशगुल है
जिंदगी का बस एक ही ऊसुल है..!!

तुझे गिरना भी खुद है,
और सम्हलना भी खुद है..!!

तू छोड़ दे कोशिशें,
इन्सानों को पहचानने की…!!

यहाँ जरुरतों के हिसाब से,
सब बदलते नकाब हैं…!!

अपने गुनाहों पर सौ पर्दे डालकर,
हर शख़्स कहता है, “ज़माना बड़ा ख़राब है”

ख़ुशी एक ऐसा एहसास है,
जिसकी हर किसी को तलाश है.

गम एक ऐसा अनुभव है,
जो सबके पास है….

मगर ज़िन्दगी तो वही जीता है,
जिसको खुद पर विश्वास है…!!

नज़र रखो अपने ‘विचार’ पर,
क्योंकि वे ”शब्द” बनते हैँ।

नज़र रखो अपने ‘शब्द’ पर,
क्योंकि वे ”कार्य” बनते हैँ।

नज़र रखो अपने ‘कार्य’ पर,
क्योंकि वे ”स्वभाव” बनते हैँ।

नज़र रखो अपने ‘स्वभाव’ पर,
क्योंकि वे ”आदत” बनते हैँ।

नज़र रखो अपने ‘आदत’ पर,
क्योंकि वे ”चरित्र” बनते हैँ।

नज़र रखो अपने ‘चरित्र’ पर,
क्योंकि उससे ”जीवन आदर्श” बनते हैँ।

फूल कभी दो बार नहीं खिलते,
जन्म कभी दो बार नहीं मिलते,
मिलने को तो हजारो लोग मिल जाते है
पर हजारो गलतियां माफ़ करने वाले
माँ बाप नहीं मिलते..!!!!