जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाय,
शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर कर जिया जाए।
जब जलेबी की तरह उलझ ही रही है तू ए जिंदगी
तो फिर क्यों न तुझे चाशनी में डुबा कर मजा ले ही लिया जाए!

Zindagi tujhse har kadam par samjhota kyun kiya jaye,
Shauk jeene ka hai magar itna bhi nahi ki,
Mar-mar ke jiya jaye.
Jab jalebi ki tarah ulajh hi rahi hai tu Aey zindagi,
Toh fir kyun na tujhe chaashni mai dubokar maza hi le liya jaye.

समझ ना आया ऐ जिंदगी तेरा ये फलसफा,
एक तरफ कहती है सबर का फल मीठा होता है
और दूसरी तरफ कहती है
वक़्त किसी का इंतजार नही करता

Samajh Nahi Aaya Aye zindagi Tera Ye Falsafa
Ek Taraf Kehte he Sabar ka Fal Meetha Hota He
Aur Dusri Taraf Kehte hai
waqt kisi ka intazar Nahi karta..!!

अपनी तो ज़िन्दगी है अजीब कहानी है,
जिस चीज़ की चाह है वो ही बेगानी है,
हँसते भी है तो दुनिया को हँसाने के लिए,
वरना दुनिया डूब जाये इन आखों में इतना पानी है।

Apni To Zindagi ki Ajeeb kahani hai.
Jis Cheez ko Chaha Wo Hi Begani hai
Haste hain Dunia ko Hasane k Liye Warna
Dunia Doob Jaye In Ankhon Main Itna Pani hai..

चलो! थोड़ी मुस्कुराहट बाँटते है..
थोड़ा दुख तकलीफों को डाँटते है..
क्या पता ये साँसे चोर कब तक हैं?
क्या पता ‘जिन्दगी की चरखी’ में ड़ोर कब तक हैं?

Chalo! Thodhi Muskurahat batte hain..
Thodha dukh taklif ko daat te hain..
Kya pata ye saanse choor kab tak hain..
KYa pata Zindagi ki chargi me door kab tak hai!

अपनी जिंदगी के अलग असूल हैं,
यार की खातिर तो कांटे भी कबूल हैं,
हंस कर चल दूं कांच के टुकड़ों पर भी,
अगर यार कहे, यह मेरे बिछाए हुए फूल हैं.

Apni zindagi ka alag usool hain,
Pyar ki khatir to kante bhi qubool hai,
Hans ke chal du kaanch ke tukdo par,
Agar pyar kahe ye mere bichaye hue phool.

फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में,
फर्क होता है किस्मत और लकीर में..
अगर कुछ चाहो और न मिले तो समझ लेना..
कि कुछ और अच्छा लिखा है तक़दीर में।

Fark Hota hai khuda aur Fakir me..
Fark hota hai kismat aur Lakir me,
Agar kuch Chaho Aur na Mile To samaj Lena ki..
kuch aur Accha Likha hai Takdir me.