जब दर्द भी मेरे हों, और दास्तान भी मेरीतो किसे इल्जाम दूँ,…

जब दर्द भी मेरे हों, और दास्तान भी मेरी
तो किसे इल्जाम दूँ, किसे हाल-ए-दिल सुनाऊँ…

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