घर की दहलीजपर

घर की दहलीज पर बैठी मैं सोच रही क्या हो जो मैं उस पार चली जाऊं अपनी ख़ोज में कहीं अपनो को ना खो जाऊं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *