कुछ तो हैं जो तय करना अभी बाकी हैं

कुछ तो हैं जो तय करना अभी बाकी हैं
कई दफा और जीना मरना अभी बाकी हैं
खोल देखा मुड़े पन्ने जो जीवन के
निकले वही जिनमे लिखना अभी बाकी हैं
लग सीखा दरिया मे ,तैर लेने का हुनर
डूबा बहोत , उतर जाना बाकी है
ढल रहा है सूरज , उसे कहाँ ख़बर
उम्मीदें झाखे है धोस्लो से , पूरा करना अभी बाकी है
हस के बढ़ गये आगे , समझाया तो बहोत होगा
ये जवाब तेरा था , सवाल मेरा अभी बाकी है
धूल थी आइने में , या मेरी आखो में
जर्रे जर्रे में तेरा होना अभी बाकी है
अधूरी सांस , अधूरी धड़कन और बंद होती ये आँखे
एहसास नया सा है , बया करना अभी बाकी है
अर्पित चतुर्वेदी

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