किसी रोज़ याद न कर पाऊं तो खुदगर्ज़ न समझ लेना दोस्तों

किसी रोज़ याद न कर पाऊं तो खुदगर्ज़ न समझ लेना दोस्तों,
दरसल छोटी सी इस उम्र में परेशानिया बहुत हैं,
मैं भूला नहीं हूँ किसी को मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं ज़माने में,
बस थोड़ी ज़िन्दगी उलझ पड़ी है दो वक़्त की रोटी कमाने में|

Kisi roj yaad na kar pau to khudgarj na samjh lena,
Darasl choti si iss umar mai presaniya bhut hai,
Main bhoola nhi hu kisi ko mere bahot achhe dost hai zmane me,
Bs thodi zindagi uljhi pdi hai do waqt ki roti kmane me.

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